Sunday, September 7, 2008

नादान


मनो मेरी बात
विशवास करो
विशवास करो कि मैं नादान हूँ
फिर कहते क्यों हो
यह तो दिखाई देने वाली शय है
उन्हे परिभाषा भी तो मालूम हो
जिन्हे बताओगे
वे जान पयेगै तब
अर्थ मालूम होगा जब
देखा होगा, महसूस किया होगा
फिर किसे बताओगे
अपने आप को
या फिर अपने ही जैसे किसी को
जिसे ढूंढ़ना होगा भीड़ मैं
सबसे अलग , असाधारण
उससे कहना
कि तुम नादान हो

इसे बचाना भी है मुश्किल
मुझे मालूम है
कुछ दिनों मैं
वैसे दिखने लगोगे तुम
जैसे दीखते है सब
साथ कोई हो
जो प्रेरणा दे
टोके, गलती करने पर

संपर्क करोगे
बहार निकलोगे
कैसे कैसे रंग
अन्तर हो जाएगा फिर
तुममे और उसमें
तुम्हे सायद कई मिल जायें
पर उसे मुश्किल से मिले हो तुम

अंतहीन दिशाहीन तलाश
मुश्किल से मिले हो
इसलिए मिलकर रहो
बहार मत जाना
ताकि रंग डालें लोग
सम्भव है
अपनी दुनिया बनाना
जिसमें कुछ सीमित लोग हों
सब सफ़ेद
आपस मैं एक दूसरे से कहें
हम सब नादान हैं
मुश्किल से मिले हो
इसलिए मिलकर रहो
और उनसे कहो
कि तुम नादान हो
फूलों कि तरह
बच्चो कि तरह


चित्र जेनन_जेनन द्वारा

1 comments:

संगीता पुरी on September 7, 2008 10:48 AM said...

आपस मैं एक दूसरे से कहें
हम सब नादान हैं
मुश्किल से मिले हो
इसलिए मिलकर रहो
और उनसे कहो
कि तुम नादान हो
फूलों कि तरह
बच्चो कि तरह
नादान बने रहने में ही भलाई होती है।

 

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